Friday, January 23, 2015

Hungry क्या ? Have some भाषा !


फंस गया साला, अब करूँ तो क्या ? 

बड़े फ़क्र से मै आज कहता हूँ कि मै हिंगलिश मे लिखना शुरू कर रहा हूँ। लोगों ने मेरा जीना दूभर कर दिया था कि पुनीत जी हिन्दी या इंग्लिश  मे बोला करिए आपकी भाषा समझ नहीं आती है। अरे  भाई मुझे हिन्दी और इंग्लिश के अलावा कोई और language आती ही नहीं। अब उनसे कैसे कहूँ की आप ही थोड़े illiterate से हैं जो न हिन्दी समझते न इंग्लिश। पर बड़े  आश्चर्य की बात ये है कि ऐसे लोगों की गिनती ने उनको समाज मे majority dewellers बना दिया है। इसलिए झक्क मर कर मुझे मेरे उन प्रिय दोस्तों और students  के लिए  Hinglish  का प्रयोग करने मे ही अपनी भलाई समझी। पर चाह कर भी ये पुण्य मुझ जैसे linguistic पापी से ये हो नहीं पा रहा इसलिए मैंने बीच का रास्ता निकाला और आपके सामने ये मिली जुली सरकार का face प्रस्तुत किया। वैसे मै जो लिख रहा हूँ वो शायद "Anglo-Devanagri" है। अङ्ग्रेज़ी कीबोर्ड की कलाकारी।    

नयी तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले पुराने तीर्थ यात्रियों से ज्ञान लेना ही उचित होता है, कि कहीं पैर फिसल किसी खाई मे न गिर जाये, इसलिए  दूसरे popular blogs की भाषा को देखा और ये तारीका उत्तम लगा।
जागृति फिल्म में कवि प्रदीप का गीत था, सबने सुना होगा यार, नहीं सुना तो अभी 26 जनवरी को फिर बजेगा सुन लेना। मैंने थोड़ी सी गुस्ताखी कर उसके अपने लिए गाया तो कुछ ऐसे स्वर निकल के बाहर आए

हम तूफान से लाए हैं कश्ती निकाल के,
मेरे बच्चों रखना तुम Hinglish संभाल के...

अगर आपका मन 26 जानवरी को लता या कवि प्रदीप के गाने सुनने का न हो तो आपके लिए पेश है एक बड़ा ही  रोचक और relevant broadcast। अरे भाई अपने नावेद  जाफरी का है  और Radio Mirchi से  है, अब तो सुनना बनता है-
Naved and his command over the English language can have you in splits.Listen in 
 (Courtesy: Radio Mirchi)

 अगर लिंक क्लिक करके सुना होगा तो  एक बार हँसे ज़रूर होगे आप , जो लोग हँसे नहीं वो शायद  बुद्धिजीवी हैं जो  मेरी तरह ही समाज मे आते बदलाव से चिंतित हैं। परंतु हिन्दी ब्लॉगिंग ने हिन्दी को एक नयी tonic tablet दी और Whatsapp, Twitter  ने cosmetic surgery कर हिन्दी को ramp पर ला दिया है। बाधाई हो हम फिर जवान हो गए! अब इस जवानी को बरकरार रखना है और बिना किसी मिलावट के,  cosmetic  के, अपने मूल स्वरूप मे रखना है।

 खैर ये post भाषा पर नहीं है सिर्फ अपनी बात आगे  posts  मे  करते रहने लिए आपसे एक अनुमति है। 
मेरी पूरी कोशिश होगी की मै अच्छी  हिन्दी प्रयोग करूँ क्यों की जिस उद्देश्य से ये ब्लॉग शुरू करा है उसमे अपनी भाषा को नयी ऊंचाइयों तक ले जाना भी एक है, परंतु एक दम से  हमारे प्यारे स्टूडेंट्स इतना बड़ा  change  बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे,  इसलिए अत्यंत अपेक्षित अंग्रेज़ी शब्दों का संतुलन साधते हुए प्रासंगिक Hinglish का व्यवहार करूंगा। ( थोड़ी भारी लगी न हिन्दी की ये  last line?)
कोई बात नहीं, hungry  आदमी कुछ भी खा सकता!


माँ सरस्वती  हमे शुभ वाणी दें!
 इसी शुभकामना के साथ 





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