Wednesday, January 28, 2015

शीर्षक का औचित्य एवं ब्लॉग के उद्देश्य (Justification of the title and mission statement)

भारत और विदेश की शिक्षा व्यवस्था मे मुख्य चीज़ जो अलग है वो है objectivity (तथ्यपरकता) और clear objectives का होना। वे जो भी पढते लिखते करते वो well defined होता, उसका एक आधार होता, इसीलिए उसके outcomes ज्यादा और अच्छे होते। हम भी कुछ अच्छी आदतों की शुरुवात करते हुये अपने blog को एक उद्देशपूर्ण और सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाएँगे। मैंने हम इसलिए कहा की अब से ये ब्लॉग पाठकों की भी संपत्ति है, आप ही इस से  लाभान्वित होंगे, आप ही इस मे भागीदार होंगे और इसे बेहतर बनाएँगे। मै तो सिर्फ आपका facilitator, चिंगारी दिखाने वाला हूँ। आइये जानते  हैं की मैंने इस ब्लॉग का शीर्षक "अंग्रेज़ चले गए" क्यों रखा है और वर्तमान, आगामी लेखों के क्या उद्देश्य होंगे।


courtesy: ariseindiaforum.org

एक आकर्षक शीर्षक बड़ा ही महत्वपूर्व होता है, ये न सिर्फ लेखक बल्कि पाठकों को भी रोमांचित एवं motivate करते रहता है। कैसे? अरे भाई शीर्षक  मे ही तो  सब कुछ छिपा होता:

चेहरे  मे दम हो तो लड़की यूं ही पट जाती,
खाना  रंगीन हो तो उपवास मे भी चटनी चाट  ली जाती।

 वास्तव में एक शीर्षक में सम्बद्ध रचना का सार निहित रहता है। "अंग्रेज़ चले गए" के पीछे एक गहन सोच और परिवर्तन की नदी का स्त्रोत है। सोने की चिड़िया वापस बनने  के लिए ये जानना ज़रूरी की गरीबी की बीमारी कहाँ से लगी और कैसे निकलेगी। ये कहाँ और कैसे की खोज करते करते ही मै अंग्रेजों की नगरी इंग्लैंड पहुंचा और जाना की वो हम से क्या क्या ले आए हैं। उनसे वो सब जाना  जो वो हमसे ही छीन कर ले गए थे और कुछ उतरन हमे  उपहार स्वरूप दे गए थे जिसमे हम खज़ाना समझ आज तक सहेजे बैठे हैं। हमारी बीमारी सिर्फ आर्थिक ही नहीं मानसिक गरीबी भी है। कुछ पुरानी है कुछ दूसरों की दी हुयी है और कुछ हम बाहर से लेने की कोशिश मे अभी भी लगे हुये हैं। इसलिए अपने "सामाजिक परिवर्तन" के उद्देश से शुरू किए इस ब्लॉग मे मैंने लोगों को जगाने के लिए सबसे पहले ये आवाज़ लगाना उचित समझा की  अरे देशवासियों, मित्रों! नींद से जागो! आज़ाद हुये बहुत समय बीत गया, अंग्रेज़ जा चुके हैं, गुलामी के एहसास से मुक्त हो। अपने actions और सोच मे परिवर्तन लाओ।

शीर्षक से जितनी अधिक बातों का पता चलता है उस से readers की अपेक्षा भी उतनी अधिक मात्रा  मे बढ़ती है। उचित भी है। इसलिए अब मै सीधे आपसे blog मिशन (writing mission statement) एवं उद्देश्यों की चर्चा करना चाहूँगा। ब्लॉग की विषय वस्तु (subject matter) भी साथ साथ बताना चाहूँगा।

पहले ये जाने की blog और इसमे लिखे जाने वाले लेख क्या नहीं होंगे:

  • यह कोई theory site नहीं है। यहाँ sociological models का जमावड़ा नहीं होगा।
  • वर्तमान politics का कोई क्रमवार घटनाक्रम का उल्लेख नहीं होगा
  • किसी धार्मिक, राजनीतिक  या सरकारी संस्था का इस से कोई सीधा संबंध नहीं है। इलसिए किसी को सीधा बढ़ावा देने वाला कोई लेख नहीं होगा।
  • किसी संस्था, सरकार आदि की नीतियों का सीधा विरोध भी नहीं होगा।
  • यहाँ "Social Change and Development" एवं " Better Living "  से अलग किसी अन्य topic, category के लेख को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।

तो क्या है ये blog:
  • सर्वप्रथम ये एक हिन्दी भाषा को promote करने के उद्देश्य  से बनाया  गया ज्ञान और सामाजिक परिवर्तन का एक माध्यम है।
  • यहाँ society एवं नागरिकों द्वारा  जो परेशानी face  की जा रही है उनके बारे मे बात की जाएगी जिस से उनका practical solution निकाला जा सके.
  • यहाँ मुख्यता "Social Change " और "Energy Medicine" के बारे मे लेख होंगे। लेखों का उद्देश्य सर्वप्रथम लोगों को वैचारिक तौर पर स्वस्थ और virtuous and spiritual living की तरफ प्रेरित करना होगा। 
  • यह  एक जागरूकता (awakening) लाने का अभियान है जिस से समाज मे positive change लाया जा सके 
  • यह  व्यक्तिगत परिवर्तन (individual transformation) से देश मे परिवर्तन  लाने का अभियान है
  • यह  लोगों को , citizens को join करने और उन्हे एक बड़े platform पर काम करने  के लिए प्रेरित करने का अभियान है। 
  • यह लोगों को एक दिशा निर्धारण मे सहायता  का अभियान है
  • यह लोगों को एक better living के लिए प्रेरित करने का  अभियान है
  • यह  हिन्दी भाषा मे अच्छे और quality articles की कमी को पूर्ण करने का अभियान है।  परंतु  ज़रूरत पड़ने पर English मे  भी कुछ अति उपयोगी ज्ञान उपलब्ध कराना  जो better living मे सहायक  हो। 
  • यह translation द्वारा कुछ मुख्य theories, ideas,articles, books आदि के ज्ञान को सभी तक पहुंचा के transformation मे सहायता करने का अभियान है। 
  • यह  लोगों को सोचने पर (food for thought) मजबूर करने का अभियान है। 
  • यह  लेखों की series के द्वारा मुद्दों को उठाने और उनका हल ढूंढने का प्रयास है. 
  • यह  एक सामाजिक परिवर्तन का आगाज है। 

ये points पढ़  के लग रहा होगा की लो  फिर आ गया कोई एक समाज सुधारक की आत्मा से पीड़ित बड़ी बड़ी बातें करने वाला । खैर जनाब यहाँ हम बड़ी-बड़ी  बातें नहीं छोटी-छोटी रोज़्मर्राह की बातें करेंगे जो अपने आप ही इन उद्देश्यों को पूरा करने मे सक्षम है। बस आप नियमित blog पढ़ते रहिए और बाकी  मुझ पर छोड़ दीजिये। आपको enjoyment के साथ social cause से जोड़ना मेरी ज़िम्मेदारी है। ध्यान रहे अंग्रेज़ चले गए हैं, अब डरने की कोई ज़रूरत नहीं विकास और उन्नति हमारा हक है। 


गणेश जी हम सबको बुद्धि, विवेक और बल प्रदान करें।

इसीशुभकामना के साथ

4 comments:

  1. I am happy that somebody is working on these line in society. Where our actions are only directed towards getting all the material needs fulfilled. I appreciate your effort.

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    1. धन्यवाद Anam जी। आपका प्रोत्साहन हमारे लिए प्रेरणादायक है। आगे भी blog पढ़ते रहये एवं अपने मित्रों तक इसे पहुंचाते रहिए। Thanks

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  2. Dear Sir, You have always come across with new initiative personal & professional front. That motivated us in day to day life. I hope this blog as well will spread motivation to society. Congratulation & best wishes.

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    1. Thanks Piyush, I have found you to be always very supportive and enthusiastic. People like you have always given me new ideas and motivation to move ahead. Thanks for appreciating and keep following the future posts. Once the NGO work is launched you will surely have tasks to enjoy.

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