Friday, January 30, 2015

क्या है सामाजिक परिवर्तन? What is the meaning of Social Change?

 मै पिछली पोस्ट मे blog के उद्देश्य आपको बता चुका हूँ। सुधार और बदलाव के मुद्दों पर चर्चा एवं कार्य  शुरू करने से पहले आइए आज जानते हैं  की "सामाजिक परिवर्तन  और विकास " है क्या बला ? मै कोई समाज शास्त्र की ढ़ेर सारी theories और boring बातें आप पर यहाँ नहीं थोपूंगा, अत्यंत ही practical और उपयोगी चर्चा करूंगा। बिलकुल बोल चल की अपनी शैली मे (colloquially) ही कहूँगा।  आज की पोस्ट एक introductory (परिचयात्मक ) लेख है । आगे posts  मे  विस्तार मे हम एक एक मुद्दा लेकर उसकी गहराई मे जाते जाएंगे ।  अभी आप जान पाएंगे कि :



R.K. Laxman’s “The Common Man”


●social change है क्या , और दुनिया और भारत मे इसको लेकर thinkers  ने क्या नया करा और दिया है जो हमारे लिए उपयोगी है।


 ●भारत मे इसके मायने क्या हैं?


 ●एक आम आदमी का इसमे क्या role, योगदान है ।


 ●theory से आगे  क्या हैं "परिवर्तन " के practical मायने


 ●कौन कौन कहाँ क्या कर रहा है और हमे क्या करना है ? 



Social Change एक बहुत ही विस्तृत term है। समाजशास्त्रियों की ढ़ेर definitions का बोझ न ढोते हुये थोड़े  से सरल शब्दों  मे आपको बताने की कोशिश करता हूँ : "सामाजिक परिवर्तन समाज के आधारभूत ( basic ) परिवर्तनों पर प्रकाश डालने वाला एक विस्तृत एवं कठिन विषय है।...परिवर्तन एक व्यापक प्रक्रिया है। समाज के किसी भी क्षेत्र में विचलन (deviation ) को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है। विचलन का अर्थ यहाँ खराब या असामाजिक नहीं है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक, नैतिक, भौतिक आदि सभी क्षेत्रों में होने वाले किसी भी प्रकार के परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है।"(1) 

समाज शास्त्र एक पूरा subject है जिसमे MA, PhD तक होती।  बाल की खाल तक निकाल दी गयी है रिसर्च कर समाज और सामाजिक ढांचे को लेकर। पर theory और practical  के अंतर को हमे समझना होगा। लोग  Social Work मे पढ़ाई करते और अपना career भी बनाते। परंतु समाज मे बदलाव लाने के लिए theory से आगे   practical action की ज़रूरत होती। कम पढे लिखे  कबीर की तरह काम करना सबसे सरल और effective होता। लिखो, गाओ और जन जन तक पहुंचाओ। लोग फिर स्वयं ही कबीरपंथी जो जाते। इसलिए, Social Change के   factors, sources, theories  आदि मे हम यहाँ नहीं पड़ेंगे और ये समझेंगे की भारत के संदर्भ मे इसका क्या मतलब। आइये अपनी भारतीय फिल्मों से इसे समझते हैं: मुन्नाभाइ MBBS, स्वदेश मे  शाहरुख खान ,  OMG मे परेश रावल, मे जो करते दिखे वो सब परिवर्तन ही था। Real life मे मेधा पाटकर, RTI लगाने वाली लखनऊ की ऐश्वर्या, महात्मा गांधी, चाणक्य, दयानंद सरस्वती, टागोर, वर्घीस कुरियन , छतीसगढ़ की फूलबासन यादव, अंबेडकर, कबीर, वीर सावरकर या राजीव दीक्षित आदि इनहोने जो करा वो है Social Change and Development. भारत से हटकर अगर प्रेरणा लेने के लिए देखें तो विश्व मे अंबार है thinkers और reformers का जैसे Barnardo, Bergh, Eaton, H. Keller, Lange, Woodhull, Mills, Mott, और न जाने कितने नाम जो शायद आपने सुने ही नहीं होंगे। जो सुने होंगे वो होंगे Marx, Plato, Dalai Lama, Abraham Lincoln, Nelson Mandela, Rousseau, Martin Luther आदि। बहुत लंबी list है। Reformer, activist, revolutionist etc सब अलग अलग होते हैं पर हमारा मतलब उन सब से है जिनहोने समाज मे बदलाव लाया। आइये अब ये जाने की दुनिया मे अभी तक समाज मे कुछ मुख्य बदलाव या बदलाव लाने वाली चीज़ें क्या रहीं : Neolithic revolution, discovery of wheel , irrigation, cultivation, industrialization, modernization, urbanization, bureaucratization, Renaissance, Acculturation (उत्संस्करण) और सबसे नया Globalisation, इत्यादि । इन सब ने समाज मे बदलाव लाया। अगर आप ऊपर के कुछ 2-3 नामों से भी परिचित हैं तो आप समझ पाएंगे की परिवर्तन क्या बला रही है। इन सभी लोगों के कार्यों ने हमारे सामाजिक ढांचे में मौलिक (fundamental) परिवर्तन लाया। एक वर्तमान के उदाहरण से समझ लें। हमारा आधुनिक समाज आधुनिक प्रौद्योगिकी (technology) का परिणाम और उत्पाद है जिस से हम लोगों के करीब आ गए हैं, सोच व्यवहार और जीवन शैली सब बादल गयी है। इसने ही trade union , specialization जैसी सामाजिक व्यवस्था को जन्म दिया है।

 चलिये अब असल मुद्दे पे आते हैं। एक आम आदमी कैसे वो सब कर सकता जो इन महान सब लोगों ने करा। अरे साहब एक अकेला Marx तो Communism  लेकर आ नहीं गया था, गांधीजी ने अकेले तो दांडी मार्च करा नहीं था, आम लोग ही दे थे न इनके साथ , हाल ही मे कितने देशों की सरकार पलट दी गईं हैं आम लोगों के द्वारा ।  भारत तो क्रांति, भ्रांति,शांति,  सनक, झनक आदि को पालक झपकते  ही अपनाने वाला देश है। यहाँ देर क्या लगती है । अब देख ही लो मोदी जी जीत ही गए चुनाव। अन्ना  और केजरीवाल भी लगे हुये हैं। परंतु अभी भी कुछ कमी है। लोग बुलाने से जुड़ रहे, जुड़ कर लोगों को नहीं बुला रहे। लोगों को बदलाव के सही मायने , सही tools  और हथियार अभी भी नहीं पता। लोग बिना  धरना दिये भी जुड़ सकते, बेहतर और अधिक संख्या मे, जैसे मोदी जी को जिताने के लिए जुटे थे Facebook और  Whatsapp पर। वो दमदार लेख, चर्चा और विचारों का आदान प्रदान ही था जो भारत मे राजनीतिक बदलाव लाया बिना कोई दंगा और व्यवस्था  तोड़े। अब हमको इसी तरह सामाजिक परिवर्तन लाना है। लेखन और networking से जुड़ कर। अब क्या ये बताना पड़ेगा की एक अकेला इंसान क्या कर सकता। बहुत कुछ। (मेरी आगे आने वाली पोस्ट इसी पर, विस्तार से, आधारित होगी।) देखिये अपने देश के journalists भी यह ही बात कह रहे :     "ऐसा नहीं है कि अंग्रेजो के जाने के बाद इस देश मे क्रांति नहीं हुई हैं।... पिछले सत्तर  सालो मे इस देश मे अनेको छोटी बड़ी क्रांतियाँ हुई हैं पर उनको दबा दिया गया।...  जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को भला कौन भूल सकता हैं वह भी तो एक आम नागरिक ने ही शुरू किया था।... देश के आम आदमी को अगर देश का विकास करना है तो आगे आना होगा उन समाजसेवियों को जो शांति पूर्ण ढंग से  आंदोेलन कर सके और देश मे जो गलत हो रहा है उसका विरोध करे और देश की जनता साथ दे तभी परिवर्तन हो सकता है।" (2)      परिवर्तन की बात हर जगह हो रही पर एकजुट होने के लिए आम आदमी का  tools का आधार और plan of action नहीं बन पा रहा, उचित  कार्रवाई की योजना नहीं बन पा रही।


पूरी दुनिया मे बहुत लोग और संस्थाएं हैं जो इसमे काम कर रही हैं।  आपको बस उनसे जुड़ना है। आप पहला कदम बढ़ाइए आपको सब जानकारी उपलब्ध हो जाएगी।  तो शुरुवात अभी से करिए, बस इतना प्रश्न खुद से कीजिये की सामाजिक बदलाव के एजेंट की तरह आप  क्या कर रहे हैं ("What kind of social change agent are you?") (3)   बाकी आगे के रास्ते खुद निकाल आएंगे।  जहां आपने एक बार सोचना चालू करा!  सोचिए और नीचे कमेंट बॉक्स मे चाहे तो लिखिए। फिर  देखिये कैसे लोग जुडते और आप zero से hero और जल्द ही परिवर्तन के agent बन जाते।
 
"मै क्यों जुड़ूँ" ? आया होगा ये प्रश्न भी आपके मन मे अभी। जुड़ना तो पड़ेगा ही। अभी जुड़ जाएँ तो बेहतर होगा। "क्यों"?  अगर आपकी उम्र ज्यादा नहीं सिर्फ  30-35 साल भी  है तो आपने स्वयं ही देखा होगा की भारत मे बहुत तेज़ी से मानवीय रिश्तों  मे बदलाव आया, industrialization, globalization  का युग आया, नई समस्याएं उभरी जो सामाजिक परिवर्तन का कारण बनी। हर रोज समाज में नए और अजीब परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न हो रही है, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की। नयी जीवन शैली, सोच, सामाजिक व्यवस्था और परेशानियाँ अब स्थाई हो चली है। लोग दुख, परेशानी और चिंता मे जीने के आदि हो गए हैं और जिद्दी भी। मानने को ही तयार नहीं की वो गलत दिशा मे जा रहे, अंधा  अनुसरण कर रहे, वो mutant (उत्परिवर्ती) बन रहे। हम जिसको विकास समझ रहे वो विकास न होकर एक जल्दबाज़ी मे अपनाया गया आचरण (conduct) और कदम  है। विकास की परिभाषा, और हम भारतीयों का आगे बढ़ना, दोनों मे बहुत  फर्क है। अंग्रेज़ हमे जो अपनी विरासत देकरगए हैं ये उसी का नतीजा है। इस ब्लॉग के माध्यम से आप  आगे posts से जानेंगे  कि क्या क्या ऐसा है जो हम कर  रहे हैं जो सिर्फ एक छलावा (phantasm) है। कौन कौन सी सामाजिक  व्यवस्थाएँ और individual practices ऐसी हैं जिनमे परिवर्तन ज़रूरी है।  वास्तविक विकास क्या होना चाहिए और और  किस तरह से हो सकता है।  अभी सिर्फ इतना समझ  लीजिये की आप को ही पहल करनी है। तो  थोड़ा सा दिमाग घुमाइए और सोचिए, नीचे blog comments मे लिखिये जो points आपको आज कि पोस्ट के बाद सोचने पर मजबूर कर रहे हैं....  

परिवर्तन के लिए अब हमारा पहल करना ज़रूरी है वरना देर हो गयी तो आने वाली generations कुछ न कर पाएगी क्यों कि   mutation  बहुत  अंदर तक घर कर चुका होगा लोगों की  आत्मा और genes तक। अब स्वयं के अस्तित्व (existence) के लिए  हर आम इंसान को social change के लिए "परिवर्तन अभियान" से जुड़ना ही  होगा।  इसकी पहली सीढ़ी  है संवाद (discussion ) और लिखना।   

 ऐ मेरे दोस्त तू क्यों है इतना मदहोश

 कलम उठा बन सरफरोश


चित्रगुप्त महाराज आप सब पे कृपा बरसाएँ

इसी  शुभकामना के साथ 


संदर्भ सूची
  1. विकिपीडिया . 2014. सामाजिक परिवर्तन. [ONLINE] Available at: http://hi.wikipedia.org. [Accessed 30 January 15].
  2. Walden University . 2015. 2013 Social Change Impact Report. [ONLINE] Available at: http://www.waldenu.edu/about/social-change/impact-report-2013. [Accessed 30 January 15].
  3. Amarujala Blog. 2014. क्या आम आदमी परिवर्तन ला सकता है।. [ONLINE] Available at: http://blog.amarujala.com. [Accessed 30 January 15].




udaipur. मानवीय रिश्ते बदले, यंत्रों का युग आया, नई समस्याएं उभरी जो सामाजिक परिवर्तन का कारण बना। हर रोज समाज में नए नए परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। हमारे सामने ऐसी घटनाएं घटित हो रही है, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की। इन घटनाओं ने समाज को ऐसी दिशा दी है, जो अब स्थाई हो चली है। इसमें परिवर्तन के लिए या इसमें बदलाव के लिए आवश्यक है कि अब हम ही पहल करें।
इन कारणों का पता लगाए तथा नियमों का प्रतिपादन करें जो समाज हित में हो। उसमें बदलाव का कारण नहीं बने। यह निर्णय 38वीं सोशियोलॉजिकल कांफ्रेंस में देशभर से आए विशेषज्ञों ने लिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. आईपी मोदी, सचिव राजेश मिश्रा थे। अध्यक्षता प्रो. भानू प्रताप मेहता ने की। इस अवसर पर कांफ्रेंस कॉर्डिनेटर प्रो. बलवीर सिंह और प्रो. पूरणमल यादव का सम्मान किया गया।
- See more at: http://udaipurnews.in/2012/12/29/be-a-collective-effort-for-social-change/#sthash.GRUgPnKT.dpuf
udaipur. मानवीय रिश्ते बदले, यंत्रों का युग आया, नई समस्याएं उभरी जो सामाजिक परिवर्तन का कारण बना। हर रोज समाज में नए नए परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। हमारे सामने ऐसी घटनाएं घटित हो रही है, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की। इन घटनाओं ने समाज को ऐसी दिशा दी है, जो अब स्थाई हो चली है। इसमें परिवर्तन के लिए या इसमें बदलाव के लिए आवश्यक है कि अब हम ही पहल करें।
इन कारणों का पता लगाए तथा नियमों का प्रतिपादन करें जो समाज हित में हो। उसमें बदलाव का कारण नहीं बने। यह निर्णय 38वीं सोशियोलॉजिकल कांफ्रेंस में देशभर से आए विशेषज्ञों ने लिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. आईपी मोदी, सचिव राजेश मिश्रा थे। अध्यक्षता प्रो. भानू प्रताप मेहता ने की। इस अवसर पर कांफ्रेंस कॉर्डिनेटर प्रो. बलवीर सिंह और प्रो. पूरणमल यादव का सम्मान किया गया।
- See more at: http://udaipurnews.in/2012/12/29/be-a-collective-effort-for-social-change/#sthash.GRUgPnKT.dpuf
udaipur. मानवीय रिश्ते बदले, यंत्रों का युग आया, नई समस्याएं उभरी जो सामाजिक परिवर्तन का कारण बना। हर रोज समाज में नए नए परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। हमारे सामने ऐसी घटनाएं घटित हो रही है, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की। इन घटनाओं ने समाज को ऐसी दिशा दी है, जो अब स्थाई हो चली है। इसमें परिवर्तन के लिए या इसमें बदलाव के लिए आवश्यक है कि अब हम ही पहल करें।
इन कारणों का पता लगाए तथा नियमों का प्रतिपादन करें जो समाज हित में हो। उसमें बदलाव का कारण नहीं बने। यह निर्णय 38वीं सोशियोलॉजिकल कांफ्रेंस में देशभर से आए विशेषज्ञों ने लिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. आईपी मोदी, सचिव राजेश मिश्रा थे। अध्यक्षता प्रो. भानू प्रताप मेहता ने की। इस अवसर पर कांफ्रेंस कॉर्डिनेटर प्रो. बलवीर सिंह और प्रो. पूरणमल यादव का सम्मान किया गया।
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